Latehar : लातेहार जिले के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी बिजली पहुंचने का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। सरकार की “हर घर बिजली” योजना के तहत कार्य शुरू होने के बावजूद विभागीय समन्वय की कमी के कारण कई गांवों में विद्युतीकरण का काम बीच में ही रुक गया है, जिससे ग्रामीणों में निराशा बढ़ रही है।
मनिका और लातेहार प्रखंड की सीमा पर स्थित परहिया टोला, पिपरा पत्थर, टेंगरा पत्थर, खीराखाड़ सहित कई गांव अब भी बिजली सुविधा से वंचित हैं। वर्षों तक नक्सल प्रभावित रहे इन क्षेत्रों में हाल के वर्षों में विकास कार्यों की शुरुआत हुई, लेकिन बिजली जैसी बुनियादी सुविधा अब तक पूरी तरह नहीं पहुंच सकी है।
सरकार ने बिजली से वंचित गांवों का सर्वे कर विद्युतीकरण की योजना को मंजूरी दी थी। इसके तहत संबंधित गांवों में बिजली पोल लगाने का कार्य भी शुरू किया गया। ग्रामीणों ने उत्साह दिखाते हुए स्वयं श्रमदान कर पोल लगाने के लिए गड्ढे तक खोद दिए थे।

हालांकि, कार्य के दौरान वन विभाग की आपत्ति सामने आ गई। वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पोल लगाने का काम रुकवा दिया। विभाग का कहना था कि वन क्षेत्र में किसी भी प्रकार का कार्य शुरू करने से पहले अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य है।
स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि बिजली नहीं होने के कारण पूरा क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से जुड़ नहीं पा रहा है। उनका कहना है कि यहां बड़ी संख्या में आदिवासी और विशेष रूप से आदिम जनजाति समुदाय के लोग रहते हैं, जिन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाओं में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि विभागों के बीच बेहतर समन्वय होता तो योजना समय पर पूरी हो जाती। उन्होंने सरकार से जल्द समाधान निकालकर गांवों तक बिजली पहुंचाने की मांग की है, ताकि क्षेत्र के लोगों को बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल सके।
इस मामले पर बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता राजदेव मेहता ने बताया कि वन विभाग द्वारा तकनीकी कारणों से कार्य रोका गया था। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत चल रही है और उम्मीद है कि जल्द ही समस्या का समाधान कर कार्य दोबारा शुरू किया जाएगा।

वहीं, रेंजर उमेश दुबे का कहना है कि बिना आवश्यक अनुमति के कार्य कराया जा रहा था, जिससे वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचने की आशंका थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब ग्रामीणों की निगाहें दोनों विभागों के बीच बनने वाले तालमेल पर टिकी हैं, ताकि वर्षों से बिजली का इंतजार कर रहे इन गांवों तक जल्द रोशनी पहुंच सके।



