Chhathra : चतरा में मनरेगा की जगह प्रस्तावित “VB-G RAM G” प्रणाली लागू होने को लेकर ग्रामीण विकास योजनाओं पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। आशंका है कि 1 जुलाई से झारखंड में लगभग 20 हजार ग्रामीण योजनाएं प्रभावित या बंद हो सकती हैं।
इस बदलाव से राज्य की प्रमुख योजनाएं जैसे अबुआ आवास योजना, दीदी बाड़ी और पीसीबी-ईसीबी जैसे कार्यक्रम सीधे प्रभावित होने की संभावना है।
वर्तमान में झारखंड में कई ग्रामीण विकास योजनाएं मनरेगा कन्वर्जेंस के माध्यम से संचालित हो रही हैं। इनमें मजदूरी भुगतान और कार्यान्वयन की प्रक्रिया मनरेगा के तहत होती है।
अबुआ आवास योजना में मजदूरी का भुगतान मनरेगा से किया जाता है, जबकि टीसीबी और दीदी बाड़ी जैसी योजनाएं भी इसी व्यवस्था पर निर्भर हैं।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार राज्य में वर्तमान में करीब 14 हजार अबुआ आवास योजनाएं चल रही हैं। इसके अलावा टीसीबी और दीदी बाड़ी जैसी लगभग 5 से 6 हजार योजनाएं भी सक्रिय हैं।
इन सभी योजनाओं का संचालन मनरेगा कन्वर्जेंस के जरिए किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और निर्माण कार्य को बढ़ावा मिलता है।
जानकारी के अनुसार 30 जून तक मनरेगा अधिनियम प्रभावी रहेगा, जिसके बाद इसकी जगह VB-G RAM G प्रणाली लागू होने की चर्चा है। नई व्यवस्था में 318 प्रकार की योजनाओं को शामिल करने का प्रावधान बताया जा रहा है, जिसमें मिट्टी कार्य से लेकर पक्के निर्माण कार्य तक शामिल हैं।
हालांकि इस बदलाव को लेकर अब तक स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने नहीं आए हैं, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार कन्वर्जेंस मॉडल के तहत चल रही योजनाओं की समीक्षा की जा रही है। यदि समय पर वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो कई योजनाओं को अस्थायी रूप से रोकना पड़ सकता है।
सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने इस संभावित बदलाव पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अबुआ आवास और दीदी बाड़ी जैसी योजनाएं ग्रामीण गरीबों के जीवन स्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
ऐसे में यदि योजनाएं बाधित होती हैं तो रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास की गति पर गंभीर असर पड़ सकता है।



