Ranchi : सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर रांची के छात्र सार्थक सिद्धांत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस दौरान झारखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर भी मौजूद रहे।
छात्र सार्थक सिद्धांत ने आरोप लगाया कि सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता की कमी है और टेंडर प्रक्रिया में कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव किए गए।
सार्थक ने दावा किया कि उन्होंने हाल ही में सीबीएसई 12वीं की परीक्षा दी थी और परिणाम प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर उन्होंने स्वयं टेंडर दस्तावेजों की जांच की। इसी दौरान उन्हें प्रक्रिया में कई खामियां मिलीं, जिन्हें उन्होंने सार्वजनिक रूप से उठाया।
छात्र के अनुसार, फरवरी 2025 में जारी शुरुआती टेंडर में दो कंपनियों—TCS और कोएम्प्ट एजुटेक—ने भाग लिया था। लेकिन बाद में टेंडर से जुड़े रिकॉर्ड में बदलाव किए गए और कुछ शर्तों को संशोधित किया गया।
आरोप है कि ब्लैकलिस्टिंग, टर्नओवर और प्रदर्शन से जुड़ी शर्तों में बदलाव करके एक विशेष कंपनी को योग्य बनाया गया, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई।
इस पूरे मामले को लेकर छात्र ने कहा कि यह केवल तकनीकी प्रक्रिया का मामला नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सार्थक सिद्धांत को संसद भवन में संसदीय समिति के समक्ष भी अपनी बात रखने का अवसर दिया गया, जहां उन्होंने विस्तृत रूप से अपने आरोप प्रस्तुत किए।
संसदीय स्तर पर यह मुद्दा उठने के बाद अब इस पर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। छात्र का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में यदि पारदर्शिता नहीं रही तो यह सीधे तौर पर छात्रों के परिणाम और भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल इस पूरे मामले पर सीबीएसई या संबंधित टेंडर एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



