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फूलो-झानो और मंईयां सम्मान योजना ने बदली महिलाओं की तकदीर, आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बना गुटजोरा गांव

Khunti: झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी फूलो-झानो आशीर्वाद योजना और मंईयां सम्मान योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। खूंटी प्रखंड के गुटजोरा गांव में इन योजनाओं का प्रभाव साफ तौर पर देखने को मिल रहा है, जहां कभी हड़िया-दारू बेचकर जीवनयापन करने वाली महिलाएं आज सम्मानजनक आजीविका अपनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

गांव की गीता कुमारी बताती हैं कि एक समय ऐसा था जब उनकी पहचान हड़िया-दारू बेचने वाली महिला के रूप में होती थी। लोग उन्हें इसी नाम से पुकारते थे और समाज में उन्हें वह सम्मान नहीं मिल पाता था जिसकी हर व्यक्ति अपेक्षा करता है। लेकिन फूलो-झानो आशीर्वाद योजना से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। आज वे सम्मानपूर्वक जीवन जी रही हैं और समाज में उनकी पहचान एक प्रतिष्ठित महिला के रूप में बन चुकी है।

गीता कुमारी कहती हैं, “पहले लोग हमें हड़िया-दारू बेचने वाली कहते थे, लेकिन आज लोग सम्मान की नजर से देखते हैं। इस योजना ने हमें नई जिंदगी दी है।”

वहीं गांव की बुजुर्ग महिला जोलो देवी ने बताया कि फूलो-झानो आशीर्वाद योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता से उन्होंने हड़िया-दारू का कारोबार छोड़ दिया और बकरी एवं गाय खरीदकर पशुपालन शुरू किया। आज पशुपालन से उन्हें नियमित आय हो रही है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है।

रेखा देवी बताती हैं कि पहले हड़िया-दारू बेचने के कारण उन्हें लोगों के ताने और अपमान का सामना करना पड़ता था। कई बार लोग मजाक उड़ाते थे और गाली-गलौज तक करते थे। लेकिन योजना से जुड़ने के बाद उन्होंने इस व्यवसाय को छोड़ दिया और सम्मानजनक तरीके से आजीविका अर्जित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार द्वारा शुरू की गई फूलो-झानो आशीर्वाद योजना ने उनके जीवन को नई दिशा दी है, जिसके लिए वे मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करती हैं।

गुटजोरा गांव में केवल एक-दो नहीं, बल्कि लगभग 25 से 26 महिलाएं फूलो-झानो आशीर्वाद योजना से जुड़कर अपनी जिंदगी संवार रही हैं। इन महिलाओं ने हड़िया-दारू बेचने का कार्य छोड़कर पशुपालन, स्वरोजगार और अन्य आजीविका गतिविधियों को अपनाया है। इससे न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि समाज में उनका सम्मान और आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

वहीं मंईयां सम्मान योजना भी महिलाओं और उनके परिवारों के लिए आर्थिक संबल साबित हो रही है। योजना की लाभुक नेहा कुमारी ने बताया कि वह वर्तमान में पढ़ाई कर रही हैं और योजना के तहत मिलने वाली राशि से उनकी पढ़ाई का खर्च निकल जाता है। इससे उन्हें अपनी शिक्षा जारी रखने में काफी मदद मिल रही है।

एक अन्य महिला लाभुक ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं और मंईयां सम्मान योजना के तहत मिलने वाली राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई-लिखाई एवं अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में किया जा रहा है। इससे परिवार को आर्थिक राहत मिली है और बच्चों की शिक्षा प्रभावित नहीं हो रही है।

गांव की महिलाओं का कहना है कि इन योजनाओं ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि समाज में सम्मानपूर्वक जीने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्रदान किया है। आज गुटजोरा गांव की महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होकर दूसरों के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

ग्रामीणों का मानना है कि फूलो-झानो आशीर्वाद योजना और मंईयां सम्मान योजना ने महिलाओं के जीवन में नई उम्मीद जगाई है। कभी सामाजिक उपेक्षा का सामना करने वाली महिलाएं आज आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। गुटजोरा गांव की यह कहानी महिला सशक्तिकरण और सरकारी योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरी है।

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