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स्वास्थ्य विभाग में घोटाले का बड़ा आरोप, बाबूलाल मरांडी ने CBI जांच की मांग उठाई

Ranchi : रांची में Babulal Marandi ने झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, दवा बर्बादी और एंबुलेंस खरीद में अनियमितता का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए।

मरांडी ने कहा कि Jharkhand Medical and Health Infrastructure Development and Procurement Corporation Limited (JMHIDPCL) को स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के बजाय “लूट और टेंडर मैनेजमेंट” का केंद्र बना दिया गया है। उनका आरोप है कि सरकार के संरक्षण में नियमों की अनदेखी कर करोड़ों रुपये के घोटाले किए गए।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री Hemant Soren के नेतृत्व वाली सरकार के छह वर्षों के कार्यकाल में राज्य की कानून व्यवस्था और विकास व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है तथा भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है।

मरांडी ने आरोप लगाया कि JMHIDPCL में शैलेंद्र श्रीवास्तव नामक व्यक्ति को नियमों के विरुद्ध लगातार सेवा विस्तार देकर कंसलटेंट बनाया गया। उन्होंने कहा कि 2016 के नियमों के अनुसार किसी सेवानिवृत्त अधिकारी को अधिकतम तीन वर्ष तक ही सेवा विस्तार दिया जा सकता है, जबकि 2022 के नियम के अनुसार उसके बाद मुख्यमंत्री की स्वीकृति आवश्यक है। इसके बावजूद बिना स्वीकृति के उन्हें चौथे और फिर पांचवें वर्ष तक पद पर बनाए रखा गया।

भाजपा नेता ने दावा किया कि स्वास्थ्य विभाग के ऑडिट में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि जून 2022 में लगभग 55.58 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई 206 एंबुलेंसों का उपयोग नहीं हुआ और वे एक वर्ष तक नामकुम में खड़ी-खड़ी खराब होती रहीं। अब फिर से 237 नई एंबुलेंस खरीदने के लिए लगभग 80 करोड़ रुपये की नई निविदा जारी की गई है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी गोदामों में करोड़ों रुपये की जीवनरक्षक दवाइयां एक्सपायर हो गईं क्योंकि उन्हें मरीजों तक पहुंचाया ही नहीं गया। मरांडी ने कहा कि यह स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता और भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण है।

कोविड काल की ऑक्सीजन टैंक परियोजना पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 24 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में अयोग्य कंपनियों को ठेका दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि MDD Medical Systems India Pvt Ltd आवश्यक अनुभव और सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करती थी, फिर भी उसे तकनीकी रूप से योग्य घोषित कर दिया गया।

मरांडी ने कहा कि एक अन्य कंपनी Sanatan Bus Body Building Pvt Ltd भी निर्धारित टर्नओवर मानकों पर खरी नहीं उतरती थी, बावजूद इसके उसे प्रक्रिया में शामिल किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब अधिकारियों और सत्ता से जुड़े लोगों की मिलीभगत से हुआ।

भाजपा नेता ने कहा कि सरकार पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रही है और जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑडिट के दौरान नामकुम परिसर को पूरी तरह सुरक्षा घेरे में बदल दिया गया ताकि कोई जानकारी बाहर न जा सके।

अंत में बाबूलाल मरांडी ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच Central Bureau of Investigation (CBI) से कराई जाए, ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और कैग रिपोर्ट में उजागर अनियमितताओं के आधार पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।

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