Hazaribagh : हजारीबाग की राजनीति इन दिनों भारतीय जनता पार्टी के दो बड़े नेताओं के बीच बढ़ते विवाद को लेकर चर्चा में है। Manish Jaiswal और सदर विधायक Pradeep Prasad के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। दोनों नेताओं के बयानों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि उनके रिश्तों में अब गंभीर खटास आ चुकी है।
विवाद की शुरुआत हजारीबाग के संजय सिंह क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित एक फ्रेंडली मैच से हुई थी। विधायक प्रदीप प्रसाद ने आरोप लगाया था कि उन्हें स्टेडियम में लगातार अपमानित किया जाता है और क्रिकेट गतिविधियों में जानबूझकर नजरअंदाज किया जाता है। उनका कहना था कि मैच में उन्हें शामिल करने की बात कही गई, लेकिन इसकी जानकारी तक उन्हें नहीं दी गई। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने स्टेडियम में नाराजगी जाहिर की थी, जिसके बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया।
इस विवाद के बाद सांसद मनीष जायसवाल ने विधायक प्रदीप प्रसाद को “लक्ष्मण” की संज्ञा देते हुए कहा था कि छोटा भाई यदि उदंड हो जाए तो उसे बड़े भाई का सम्मान करना सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे क्रिकेट के विकास के लिए जरूरत पड़ने पर किसी का पैर पकड़ने से भी पीछे नहीं हटेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि विधायक उनके पास आएंगे तो वे उन्हें गले भी लगा लेंगे। सांसद के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी।
सांसद के बयान पर पलटवार करते हुए विधायक प्रदीप प्रसाद ने प्रेस वार्ता कर सांसद को “धृतराष्ट्र” तक कह दिया। उन्होंने हाथ में गीता लेकर कहा कि वे सनातनी हैं और झूठ नहीं बोलेंगे। विधायक ने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि हस्तिनापुर को बचाने के लिए धृतराष्ट्र बने सांसद को अपनी आंखों की पट्टी खोलनी होगी, नहीं तो जिस तरह महाभारत में हस्तिनापुर बर्बाद हुआ था, उसी तरह हजारीबाग भी नुकसान झेल सकता है।
प्रेस वार्ता के दौरान विधायक ने हजारीबाग जिला क्रिकेट एसोसिएशन पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन कुछ खास लोगों को खुश करने के उद्देश्य से कार्य कर रहा है और खेल संस्था पर व्यक्ति विशेष का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। विधायक का आरोप था कि क्रिकेट जैसी लोकप्रिय संस्था को निष्पक्ष तरीके से नहीं चलाया जा रहा और इसमें एकाधिकार की स्थिति बन गई है।
प्रदीप प्रसाद ने यह भी आरोप लगाया कि हजारीबाग क्रिकेट एसोसिएशन में सदस्यता देने में पक्षपात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा जिला अध्यक्ष Vivekanand Singh और भैया अभिमन्यु प्रसाद जैसे लोग सदस्य बनना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सदस्यता नहीं दी जा रही। विधायक ने कहा कि जो लोग सांसद के पक्ष में नहीं होते, उन्हें संगठन से दूर रखा जाता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हजारीबाग में खेल और खिलाड़ियों के साथ राजनीति नहीं होने दी जाएगी।
इस पूरे विवाद ने जिले की राजनीति को और गर्म कर दिया है। दोनों नेता भाजपा से जुड़े होने के बावजूद जिस तरह सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं, उससे पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा नेतृत्व इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाता है और आने वाले दिनों में दोनों नेताओं के रिश्तों में सुधार होता है या नहीं।


