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रांची में मॉनिटर लिजर्ड तस्करी का भंडाफोड़, होटल से तीन गिरफ्तार

Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची में वन्यजीव तस्करी के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में मॉनिटर लिजर्ड यानी विषखोपड़ा के अंगों की तस्करी करने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई शहर के मेन रोड स्थित एक होटल में की गई, जहां से मॉनिटर लिजर्ड के अंग बरामद होने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

जानकारी के अनुसार, वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो को गुप्त सूचना मिली थी कि रांची के डेली मार्केट इलाके में स्थित होटल नटराज में कुछ लोग अवैध वन्यजीव अंगों की खरीद-बिक्री के लिए ठहरे हुए हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष जांच टीम गठित की गई और होटल में छापेमारी की गई। जांच के दौरान होटल के कमरा नंबर-203 में संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं।

छापेमारी के दौरान कमरे से एक काले रंग के प्लास्टिक बैग में मॉनिटर लिजर्ड के 30 अंग बरामद किए गए। जांच एजेंसियों के मुताबिक इन अंगों को “हत्था जोड़ी” के नाम पर तस्करी के लिए तैयार किया गया था। मौके पर मौजूद तीन लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें एक राजनीतिक दल से जुड़ा नेता, उसका बेटा और अरुण राम नामक व्यक्ति शामिल हैं। तीनों से पूछताछ की जा रही है।

वन विभाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि होटल के कमरा नंबर-203 और 206 को पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर निवासी विष्णु कुमार गुप्ता के नाम पर बुक कराया गया था। होटल प्रबंधन से पूछताछ के बाद अधिकारियों को तस्करी के इस नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। फिलहाल पुलिस और वन विभाग इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि मॉनिटर लिजर्ड भारत में संरक्षित वन्यजीवों की सूची में शामिल है और इसके शिकार, संग्रहण या व्यापार पर सख्त प्रतिबंध है। आरोपियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 (संशोधित 2022) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह अपराध संज्ञेय और दंडनीय श्रेणी में आता है, जिसमें कठोर सजा का प्रावधान है।

विशेषज्ञों के अनुसार मॉनिटर लिजर्ड के अंगों की तस्करी के पीछे अंधविश्वास एक बड़ी वजह है। इसके अंगों को “हत्था जोड़ी” नामक दुर्लभ तांत्रिक वस्तु बताकर ऊंचे दामों में बेचा जाता है। कुछ लोग इसे तंत्र-मंत्र, काला जादू और कथित औषधीय उपयोग से जोड़ते हैं। इसी अंधविश्वास के कारण देशभर में इस जीव की अवैध तस्करी का नेटवर्क सक्रिय है।

वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे वन्यजीवों से जुड़े किसी भी अवैध कारोबार की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों की तस्करी केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता के लिए भी गंभीर खतरा है। रांची में हुई इस कार्रवाई को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

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