Dumka: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद अब झारखंड, खासकर संताल परगना क्षेत्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भाजपा नेताओं का मानना है कि इस जीत का प्रभाव पड़ोसी राज्यों में भी देखने को मिलेगा और इसका सीधा असर झारखंड की राजनीति पर पड़ेगा।
गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बंगाल में मिली जीत को “हिंदुत्व की प्रखर जीत” बताते हुए कहा कि अब झारखंड में भगवा लहराने की बारी है। उन्होंने दावा किया कि संताल परगना क्षेत्र में बांग्लादेशी घुसपैठ, गो-तस्करी और बदलती जनसांख्यिकी जैसे मुद्दों को और मजबूती से उठाया जाएगा।
भाजपा का मानना है कि पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में मिली सफलता झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों, खासकर संताल परगना में राजनीतिक माहौल को प्रभावित करेगी। यह क्षेत्र लंबे समय से भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।
बंगाल के वीरभूम जिले की कई सीटों—रामपुरहाट, सैंथिया, सिउड़ी, मयूरेश्वर और लाभपुर—पर भाजपा की जीत को पार्टी कार्यकर्ता बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। भाजपा महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष रश्मि दे ने इसे “हिंदुत्व की जीत” बताते हुए कहा कि जनता ने भ्रष्टाचार और कथित आतंक के खिलाफ वोट दिया है।

वहीं, भाजपा नेताओं का यह भी कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में हुई घटनाओं और बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार जैसे मुद्दों का असर चुनाव परिणामों पर पड़ा। उनका दावा है कि इन मुद्दों पर लोगों ने एकजुट होकर मतदान किया, जिससे भाजपा को फायदा हुआ।
भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि आदिवासी इलाकों में भी पार्टी को अच्छा समर्थन मिला। द्रौपदी मुर्मू से जुड़े कथित अपमान के मुद्दे को लेकर आदिवासी मतदाताओं में नाराजगी थी, जिसका असर चुनाव परिणामों में देखने को मिला।
निशिकांत दुबे ने आगे कहा कि “अंग, बंग और कलिंग” के बाद अब झारखंड की बारी है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में संताल परगना से घुसपैठ और अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई होगी और राज्य में राजनीतिक समीकरण बदलेंगे।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियां बंगाल से अलग हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि बंगाल के नतीजों का वास्तविक असर झारखंड की राजनीति पर कितना पड़ता है।



