Ranchi : रांची में JPSC–JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की CBI जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब नए विवादों में घिरता नजर आ रहा है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी आंदोलन में रविवार को दो अलग-अलग टेंट दिखाई दिए, जिसके बाद छात्रों की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं।
शुरुआत में सभी छात्र संगठन एक मंच पर आकर भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे थे। लेकिन अब आंदोलन के संचालन, नेतृत्व और आगे की रणनीति को लेकर मतभेद सामने आने लगे हैं। आंदोलन स्थल पर अलग-अलग समूहों के बैठने से यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या छात्र आंदोलन दो हिस्सों में बंट रहा है।
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छात्रों के बीच राजनीतिक दखल को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। एक गुट का कहना है कि आंदोलन को पूरी तरह गैर-राजनीतिक रखा जाना चाहिए ताकि इसकी विश्वसनीयता बनी रहे। वहीं दूसरा पक्ष मानता है कि किसी बड़े आंदोलन को मजबूती देने के लिए सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन लेना गलत नहीं है।
हालांकि दोनों गुटों के छात्र अब भी दावा कर रहे हैं कि उनकी मुख्य मांगें समान हैं। वे JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच, CBI जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लेकिन नेतृत्व और आंदोलन की दिशा को लेकर अलग-अलग राय सामने आने लगी है।

आंदोलन स्थल पर अब छात्रों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। कुछ छात्र समूहों का आरोप है कि राजनीतिक समर्थन के कारण आंदोलन का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि व्यापक समर्थन मिलने से छात्रों की आवाज सरकार तक मजबूती से पहुंच सकती है।
रविवार को छुट्टी का दिन होने के बावजूद आंदोलन स्थल पर अपेक्षित भीड़ नहीं जुटी। अलग-अलग समूहों में बैठने के कारण पहले जैसी एकजुटता नजर नहीं आई। दिनभर छात्रों की बैठकें चलती रहीं, जिसमें आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि छात्र आंदोलन पूरी तरह विभाजित हो चुका है या यह केवल रणनीति को लेकर मतभेद है। लेकिन दो अलग टेंट और अलग-अलग नेतृत्व की तस्वीरों ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। यदि छात्र फिर से एक साझा मंच पर लौटते हैं तो आंदोलन को नई ताकत मिल सकती है, लेकिन मतभेद बढ़े तो इसका असर आंदोलन की धार पर पड़ सकता है।
