Ranchi: झारखंड कांग्रेस में अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर नया विवाद सामने आया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश सचिव एवं प्रवक्ता रह चुके जगदीश साहू ने प्रदेश नेतृत्व पर अनुशासनात्मक कार्रवाई में भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है, जबकि अन्य मामलों में पार्टी नेतृत्व चुप्पी साधे हुए है।
हाल के दिनों में कांग्रेस ने प्रदेश उपाध्यक्ष अभिलाष साहू, पूर्व मंत्री एवं पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी के सदस्य के.एन. त्रिपाठी और अमरेंद्र सिंह को अनुशासनहीनता के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसी बीच जगदीश साहू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के प्रदेश महासचिव महेश सिंह भाजपा विधायक मनोज यादव के साथ दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मिले, उन्हें गुलदस्ता भेंट किया और तस्वीरें भी खिंचवाईं, लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जगदीश साहू ने प्रदेश प्रभारी के. राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष रामेश्वर उरांव को पत्र लिखकर इस मामले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी अनुशासन सभी पर समान रूप से लागू होता है तो इस मामले की भी जांच होनी चाहिए और उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
अपने पत्र के साथ महेश सिंह और नितिन नबीन की मुलाकात की तस्वीरें संलग्न करते हुए जगदीश साहू ने दावा किया कि इससे भाजपा नेताओं के साथ उनके संपर्क का संकेत मिलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे नेता पार्टी के भीतर रहकर कांग्रेस के हितों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और इस कारण उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक है।
इस विवाद पर कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन में रहकर अनुशासन तोड़ने वाले किसी भी नेता को बख्शा नहीं जाएगा और कार्रवाई के मामले में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा।
वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि महेश सिंह की भाजपा नेताओं से मुलाकात हुई या नहीं, यह अलग विषय है। उन्होंने कहा कि पूर्व मंत्री के.एन. त्रिपाठी को गठबंधन धर्म का उल्लंघन करने के कारण शो-कॉज नोटिस दिया गया है। अब यह कांग्रेस नेतृत्व पर निर्भर करेगा कि वह अन्य मामलों में क्या निर्णय लेता है।
कांग्रेस के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर उठे इन सवालों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व महेश सिंह से जुड़े आरोपों पर कोई कार्रवाई करता है या नहीं।


