Ranchi : झारखंड में नक्सलवाद अब लगभग समाप्ति की ओर पहुंच चुका है। सुरक्षा बलों के लगातार अभियान और हथियारों की बड़ी बरामदगी ने नक्सल संगठनों को काफी कमजोर कर दिया है। कभी पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले कर उनके हथियार लूटने वाले नक्सलियों से अब उन्हीं के कब्जे से बड़ी संख्या में हथियार वापस बरामद किए जा रहे हैं। झारखंड पुलिस का दावा है कि पिछले डेढ़ दशक में न केवल लूटे गए सरकारी हथियार वापस मिले हैं, बल्कि नक्सलियों के अपने हजारों हथियार भी जब्त किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार वर्ष 2021 से 30 जुलाई 2026 तक चले नक्सल विरोधी अभियानों में कुल 972 हथियार बरामद किए गए हैं। इनमें 299 सरकारी (पुलिस) हथियार, 85 रेगुलर हथियार और 588 देसी हथियार शामिल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि नक्सलियों की हथियार जुटाने की क्षमता पर सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ा प्रहार किया है। पुलिस का कहना है कि इन अभियानों ने उग्रवादियों के नेटवर्क को गंभीर रूप से कमजोर किया है।

हथियारों के साथ-साथ सुरक्षा बलों ने बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और विस्फोटक भी जब्त किए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में 61,847 कारतूस, 2,163 आईईडी (IED) और लगभग 1,903 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। इसके अलावा नक्सलियों से करीब 2.01 करोड़ रुपये की लेवी भी जब्त की गई, जो उनके आर्थिक नेटवर्क पर बड़ी चोट मानी जा रही है।
यदि वर्ष 2014 से 2020 के बीच की कार्रवाई को भी शामिल किया जाए, तो तस्वीर और भी बड़ी दिखाई देती है। इस दौरान सुरक्षा बलों ने 277 पुलिस हथियार, 77 रेगुलर हथियार और 1,778 देसी हथियार बरामद किए थे। इसके अलावा 68,846 राउंड गोलियां, 3,661 आईईडी, 21,867.56 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री, 74,807 डेटोनेटर और करीब 6.40 करोड़ रुपये की लेवी जब्त की गई थी।

झारखंड पुलिस के आईजी अभियान नरेंद्र सिंह ने कहा कि नक्सलियों को कमजोर करने में उनके हथियारों की बरामदगी सबसे अहम रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस और केंद्रीय बलों से लूटे गए एक हजार से अधिक सरकारी हथियार अब तक वापस हासिल किए जा चुके हैं। ये हथियार नक्सलियों के आत्मसमर्पण, गिरफ्तारी और मुठभेड़ों के दौरान बरामद हुए हैं, जिससे उनकी सैन्य क्षमता पर बड़ा असर पड़ा है।
बरामद हथियारों की पहचान और ट्रैकिंग के लिए झारखंड पुलिस ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के सहयोग से आधुनिक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया है। इस प्रणाली के जरिए हथियारों के सीरियल नंबर और अन्य तकनीकी जानकारी मिलाकर यह पता लगाया जाता है कि वह हथियार किस राज्य, पुलिस इकाई या केंद्रीय सुरक्षा बल का है। इससे बरामद सरकारी हथियारों को संबंधित एजेंसी को वापस सौंपने की प्रक्रिया भी आसान हो गई है।

राष्ट्रीय स्तर पर NIA के “लॉस्ट, लूटेड एंड रिकवर्ड फायरआर्म” पोर्टल ने भी सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत किया है। इस ऑनलाइन डेटाबेस में देशभर में गुम, लूटे गए और बरामद सरकारी हथियारों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है। झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे राज्यों में सक्रिय नक्सली अक्सर एक राज्य से लूटे गए हथियार दूसरे राज्यों तक पहुंचा देते थे, लेकिन अब इस डिजिटल व्यवस्था के जरिए ऐसे हथियारों की पहचान और ट्रैकिंग पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी ढंग से की जा रही है।

