New Delhi : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है और विपक्ष भी लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
बताया जा रहा है कि जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र NEET पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई विपक्षी दल भी शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग कर रहे थे। इसी बीच उनके इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने जश्न भी मनाया।
कथित इस्तीफा पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा है कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन का बड़ा हिस्सा शिक्षा, छात्रों और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की आकांक्षाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का सम्मान करना उनका नैतिक दायित्व रहा है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करने का अवसर मिलने पर उन्होंने आभार भी व्यक्त किया।
पत्र में उन्होंने NEET-UG 2026 परीक्षा का भी उल्लेख करते हुए कहा कि 3 मई 2026 को आयोजित परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी मिलने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की गई और दोबारा परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया गया। साथ ही अगले वर्ष से परीक्षा को CBT (कंप्यूटर आधारित) मोड में कराने का निर्णय भी लिया गया।
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न कराना थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, अभिभावकों और छात्रों के सहयोग से 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई।
अपने कथित इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि उन्होंने पहले दिन से ही पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी इससे पीछे नहीं हटे। उनका संकल्प था कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया के कारण प्रभावित न हो। उन्होंने यह भी कहा कि 16 जुलाई को घोषित NEET-UG परिणाम संतोषजनक रहे और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के कई प्रतिभाशाली छात्रों ने सफलता हासिल की।
हालांकि, पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और परीक्षा प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश की, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा। फिलहाल इस दावे की आधिकारिक पुष्टि संबंधित सरकारी स्रोतों या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से नहीं हुई है। ऐसी स्थिति में इस जानकारी को आधिकारिक पुष्टि होने तक दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।



