Ranchi : रांची के शहरी क्षेत्र में डेंगू और चिकुनगुनिया जैसी वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष पहल शुरू की है। इसी क्रम में सोमवार को क्षेत्रीय मलेरिया कार्यालय में कम्युनिटी वॉलंटियर्स और फाइलेरिया यूनिट के कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य बीमारी की प्रभावी निगरानी (सर्विलांस) और नियंत्रण व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाना था।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को डेंगू और चिकुनगुनिया से बचाव के उपाय, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करने (सोर्स रिडक्शन) तथा लार्वा नाशक दवाओं के प्रभावी छिड़काव की तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि समय रहते रोकथाम के उपाय अपनाकर इन बीमारियों के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है।
स्वास्थ्यकर्मियों को बताया गया कि घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देना, कूलर, गमले, पुराने टायर, पानी की टंकियों और अन्य जल संग्रहण वाले स्थानों की नियमित सफाई करना डेंगू और चिकुनगुनिया की रोकथाम के लिए बेहद जरूरी है। साथ ही लोगों को इन उपायों के प्रति जागरूक करना भी कम्युनिटी वॉलंटियर्स की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. शाहिद करीम साबरी ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि डेंगू और चिकुनगुनिया जैसी बीमारियों की रोकथाम में सामुदायिक सहभागिता सबसे अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने सभी स्वास्थ्यकर्मियों से अपने-अपने कार्यक्षेत्र में नियमित रूप से जनजागरूकता अभियान चलाने और सोर्स रिडक्शन गतिविधियों को प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण में लार्वा नाशक छिड़काव की वैज्ञानिक विधियों, सर्विलांस की प्रक्रिया, संदिग्ध मरीजों की पहचान, समय पर रिपोर्टिंग और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी प्रणाली पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी सहित विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के समापन पर रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने आम लोगों से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति में तेज बुखार, शरीर में दर्द, सिरदर्द, त्वचा पर चकत्ते या डेंगू एवं चिकुनगुनिया से जुड़े अन्य लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय सलाह लें।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि समय पर जागरूकता, मच्छरों के प्रजनन स्थलों का उन्मूलन और संदिग्ध मामलों की शीघ्र पहचान ही डेंगू और चिकुनगुनिया जैसी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण का सबसे कारगर उपाय है। विभाग आने वाले दिनों में भी ऐसे प्रशिक्षण और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से रोकथाम अभियान को और मजबूत करेगा।

