Ranchi/Khunti : झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने 21 जुलाई को राज्य के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा के कुछ इलाकों में भारी वर्षा हो सकती है। इसके साथ ही कई स्थानों पर मेघगर्जन, वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर नहीं जाने की सलाह दी है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 22 जुलाई को भी राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा। इस दौरान रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, लोहरदगा, कोडरमा और चतरा जिलों के अलावा पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा और सरायकेला-खरसावां में भी बारिश होने की संभावना है। हालांकि इस दिन भारी बारिश का अलग से कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
22 जुलाई को उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी झारखंड के जिलों में भी छिटपुट वर्षा के साथ मेघगर्जन और तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग का कहना है कि कई स्थानों पर वज्रपात की भी आशंका बनी रहेगी, इसलिए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
23 जुलाई को भी राज्य में मौसम का मिजाज लगभग इसी तरह बना रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पूर्वी झारखंड के देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज समेत मध्य और दक्षिणी झारखंड के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। सिंहभूम, सिमडेगा और सरायकेला-खरसावां क्षेत्रों में भी वर्षा गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।
मौसम वैज्ञानिकों ने बताया है कि 23 जुलाई को भी कई स्थानों पर मेघगर्जन, वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। ऐसे मौसम में किसानों, यात्रियों और खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
बारिश के मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 जून से 20 जुलाई 2026 के बीच झारखंड में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। इस अवधि में राज्य में औसतन 391.8 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, जबकि वास्तविक वर्षापात केवल 261.4 मिलीमीटर दर्ज किया गया। यानी अब तक राज्य में लगभग 33 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है।
मौसम विभाग का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो वर्षा की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है। हालांकि यदि मानसून सामान्य स्तर तक नहीं पहुंचता है, तो इसका असर खरीफ फसलों, जलाशयों के जलस्तर और भूजल भंडार पर पड़ सकता है। ऐसे में अगले कुछ दिनों की बारिश राज्य के कृषि और जल संसाधनों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
