Ranchi : झारखंड में सुरक्षा बलों के लगातार चल रहे एंटी नक्सल अभियानों से राज्य में नक्सल संगठन लगभग कमजोर पड़ चुके हैं। पुलिस का दावा है कि अब बचे हुए नक्सली सीमित इलाकों में सिमट गए हैं और लगातार दबाव के कारण बड़े हमलों को अंजाम देने की स्थिति में नहीं हैं। सुरक्षा एजेंसियां घेराबंदी और रसद आपूर्ति रोकने की रणनीति पर काम कर रही हैं, जिसका असर नक्सली गतिविधियों पर साफ दिखाई दे रहा है।
हाल ही में 25 लाख रुपये के इनामी माओवादी कमांडर अजय महतो और 20 लाख रुपये के इनामी रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी ने नक्सली संगठनों को बड़ा झटका दिया है। पुलिस मुख्यालय के अनुसार अब बचे हुए नक्सली खूंटी, सरायकेला और चाईबासा की सीमा से लगे ट्राई-जंक्शन के जंगलों में शरण लेने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मुख्य उद्देश्य फिलहाल खुद को सुरक्षित रखना और संगठन के बचे हुए नेटवर्क को बचाए रखना है।
झारखंड पुलिस के आईजी अभियान नरेंद्र सिंह ने बताया कि शीर्ष कमांडरों की गिरफ्तारी के बाद अब अभियान का फोकस शेष बड़े नक्सली नेताओं की गिरफ्तारी, उनके वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने, हथियारों की बरामदगी और सक्रिय दस्तों का पूरी तरह सफाया करने पर है। सुरक्षा बल लगातार खुफिया सूचनाओं के आधार पर अभियान चला रहे हैं।
लगातार हो रही गिरफ्तारियों, मुठभेड़ों और आत्मसमर्पण के कारण नक्सलियों के लिए अपने पुराने प्रभाव वाले इलाकों में लौटना मुश्किल हो गया है। गृह क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की बढ़ती मौजूदगी, मुखबिर तंत्र की सक्रियता और लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन के चलते वे नए सुरक्षित ठिकानों की तलाश में ट्राई-जंक्शन जैसे दुर्गम इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने इस स्थिति को देखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और कॉम्बिंग ऑपरेशन और तेज कर दिए हैं। झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य केंद्रीय बल संभावित आवाजाही वाले मार्गों पर विशेष नजर रख रहे हैं, ताकि नक्सलियों को किसी नए क्षेत्र में पैर जमाने का अवसर न मिल सके।
साल 2026 में अब तक 22 नक्सली मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं, जिनमें सबसे अधिक कार्रवाई सारंडा क्षेत्र में हुई है। इसी इलाके में 17 नक्सलियों के मारे जाने और 25 नक्सलियों के सामूहिक आत्मसमर्पण के बाद संगठन की पकड़ काफी कमजोर हुई है। इसके बाद कई नक्सलियों ने जंगल छोड़कर निकलने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार फिलहाल सारंडा और ट्राई-जंक्शन क्षेत्र में करीब 32 नक्सली, जिनमें 15 वांटेड शामिल हैं, सक्रिय बताए जा रहे हैं। सुरक्षा बल लगातार उन्हें आत्मसमर्पण करने की अपील कर रहे हैं। झारखंड पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में राज्य में नक्सलियों का एक और बड़ा आत्मसमर्पण देखने को मिल सकता है, जिससे राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।



