Ranchi : राजधानी रांची में नगर निगम का अतिक्रमण हटाओ अभियान लगातार जारी है। सड़क किनारे लगने वाले साप्ताहिक हाट-बाजार, फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले ठेला और खोमचा संचालकों के साथ-साथ सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ निगम की प्रवर्तन टीम लगातार कार्रवाई कर रही है। नगर निगम का कहना है कि शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के उद्देश्य से यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
निगम की कार्रवाई से प्रभावित दुकानदारों और फुटकर विक्रेताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। पिछले कई दिनों से मोरहाबादी साप्ताहिक सब्जी बाजार, हरमू और अन्य क्षेत्रों के प्रभावित लोग अपनी मांगों को लेकर रांची नगर निगम कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। गुरुवार को पंडरा क्षेत्र के प्रभावित लोगों ने भी निगम मुख्यालय के समक्ष प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे वर्षों से उसी स्थान पर दुकान लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उनका आरोप है कि एक ओर जनप्रतिनिधियों की ओर से उन्हें दुकान लगाने का आश्वासन दिया जाता है, जबकि दूसरी ओर नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस की टीम उन्हें हटाने पहुंच जाती है। उनका कहना है कि लगातार कार्रवाई के कारण उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
प्रभावित लोगों ने दावा किया कि उन्हें मेयर की ओर से दुकान लगाने की अनुमति का आश्वासन मिला था और रांची के सांसद संजय सेठ ने भी मौखिक रूप से कारोबार जारी रखने की बात कही थी। इसके बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लगातार जारी है। उन्होंने नगर निगम से मांग की कि जब तक स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक उन्हें हटाया न जाए।
इस पूरे मामले पर नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा कानूनन स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सड़कें और सार्वजनिक स्थान आम नागरिकों के उपयोग के लिए हैं, इसलिए उन पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमानुसार जारी रहेगी। उनके अनुसार, निगम का उद्देश्य यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना और नागरिकों को सुरक्षित सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराना है।
नगर आयुक्त ने यह भी कहा कि कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में की जा रही है और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है। वहीं, प्रभावित दुकानदारों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके पुनर्वास और वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे। ऐसे में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और आजीविका के सवाल को लेकर शहर में यह विवाद लगातार गहराता नजर आ रहा है।


