Khunti: राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ धरती की उर्वरा शक्ति को सुरक्षित रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अन्न सभी के लिए आवश्यक है और पौष्टिक भोजन हर व्यक्ति की जरूरत है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि अन्नदाता किसान आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनें।
गुरुवार को तोरपा प्रखंड के चुरगी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित कृषक गोष्ठी सह कृषक–वैज्ञानिक अंतरमिलन कार्यक्रम के तहत ‘जैविक खेती एवं श्री अन्न का महत्व’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए अर्जुन मुंडा ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है। ऐसे में समय की मांग है कि किसान जैविक खेती की ओर आगे बढ़ें।
उन्होंने कहा कि कृषि योग्य भूमि लगातार कम होती जा रही है। ऐसे में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ बहुफसलीय खेती अपनानी चाहिए और बागवानी, रेशम पालन, लाह उत्पादन, मधुमक्खी पालन एवं पशुपालन जैसे सहायक व्यवसायों को भी बढ़ावा देना चाहिए, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके।
अर्जुन मुंडा ने कहा कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प के साथ काम कर रहे हैं और वैज्ञानिक व जैविक खेती इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है। उन्होंने खूंटी को जैविक जिला बनाने के लिए किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।
उन्होंने किसानों से मड़ुवा, गोंदली, मक्का सहित अन्य श्री अन्न की खेती को बढ़ावा देने और अपनी कृषि योग्य भूमि की बिक्री नहीं करने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि विकास के बावजूद पहाड़िया और बिरहोर जैसी कई आदिम जनजातियां आज भी मुख्यधारा से दूर हैं, इसलिए समाज हित को निजी हित से ऊपर रखना जरूरी है।


