West Singhbhum: पश्चिमी सिंहभूम जिले के प्रसिद्ध केरा स्थित मां भगवती मंदिर में मंगलवार को आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कालिका घट, पूजा-अर्चना और कठिन धार्मिक अनुष्ठानों के साथ आयोजित इस ऐतिहासिक मेले में करीब 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
सुबह से ही मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया था। गाजे-बाजे के साथ कालिका घट निकाले जाने के साथ ही श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, मंदिर परिसर और आसपास का इलाका “जय मां भगवती” के जयकारों से गूंज उठा।
इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था का परिचय देते हुए आग पर चलकर तथा कांटों पर लेटकर कठिन परीक्षा दी। भक्तों का मानना है कि ऐसा करने से मां उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। कई श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर जलाभिषेक करने पहुंचे और माता के चरणों में शीश नवाया।
मेले के अवसर पर मंदिर परिसर के आसपास भव्य मेला भी लगाया गया था। यहां प्रसाद, खानपान, खिलौने और झूलों की दुकानें सजी थीं, जहां परिवार के साथ पहुंचे लोगों ने खरीदारी और मनोरंजन का आनंद लिया।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए केरा मंदिर संचालन समिति एवं मेला संचालन समिति द्वारा व्यापक व्यवस्था की गई थी। मंदिर परिसर में बैरिकेडिंग की गई थी तथा विभिन्न स्थानों पर पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। पूरे आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मजिस्ट्रेट के रूप में सदानंद होता पुलिस बल के साथ तैनात रहे।
मेले में पश्चिम सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र की सांसद जोबा मांझी भी शामिल हुईं। उन्होंने मां भगवती के दरबार में पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की और आयोजन की सराहना की।
केरा मेला संचालन समिति के पूर्व अध्यक्ष पोरेश नायक ने बताया कि मां केरा के दरबार में मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है, इसी विश्वास के कारण यहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहीं समिति के वर्तमान अध्यक्ष अभिजीत भट्टाचार्य ने कहा कि यह पूजा पूरे जिले में ऐतिहासिक महत्व रखती है और प्रशासन व समिति के सहयोग से मेला शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
उन्होंने कहा कि यह स्थल लोगों की अटूट आस्था का केंद्र है, जहां भक्त अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए कठिन तपस्या स्वरूप अग्नि पर चलकर और कांटों पर लेटकर मां भगवती की परीक्षा देते हैं।
पूजा एवं मेला को सफल बनाने में समिति के सचिव इंदीवर सिंहदेव, कोषाध्यक्ष अनादि साहू, उपाध्यक्ष राजू साहू, सागर नायक, प्रकाश कर, राजीव सिंहदेव, प्रीतम भट्टाचार्य, मिथुन साहू, अदित्य गोप, नरेश सहित हजारों लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।


