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महिला आरक्षण पर सियासी टकराव: झारखंड कांग्रेस का बीजेपी पर आरोप—“पिछड़े वर्ग की महिलाओं का हक मारने की साजिश”

Ranchi: रांची में महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। झारखंड कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि महिला आरक्षण को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में केशव महतो कमलेश, प्रदीप यादव और दीपिका पांडेय सिंह समेत कई नेताओं ने प्रधानमंत्री के हालिया संबोधन को “झूठ का पिटारा” बताया। नेताओं का कहना था कि यह भाषण राष्ट्रहित से ज्यादा चुनावी लाभ पर केंद्रित था।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को जानबूझकर परिसीमन से जोड़ दिया, ताकि इसे लागू करने में देरी हो सके और राजनीतिक समीकरण अपने पक्ष में बनाए जा सकें।

प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि वर्ष 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को बिना देरी लागू किया जा सकता था, लेकिन सरकार ने इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़कर महिलाओं के अधिकारों को टालने का प्रयास किया।

वहीं प्रदीप यादव और दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि महिलाओं को मतदान का अधिकार और अन्य संवैधानिक अधिकार कांग्रेस शासनकाल में ही मिले। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले ही महिला आरक्षण विधेयक पारित हो चुका था, तो नए विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ी।

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर तीन प्रमुख मांगें भी रखीं। पार्टी का कहना है कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में ही 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू किया जाए, इसे 2029 तक टालने की बजाय जल्द प्रभावी बनाया जाए।

इसके साथ ही कांग्रेस ने यह भी मांग की कि ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए और जनगणना व परिसीमन के नाम पर महिला आरक्षण को टालने की राजनीति बंद की जाए। इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना है।

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