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सारंडा में माओवादियों के खिलाफ निर्णायक अभियान: एक महीने का अल्टीमेटम, सरेंडर नहीं तो कड़ी कार्रवाई तय

Chaibasa: झारखंड के घने और दुर्गम सारंडा जंगल में माओवादियों के खिलाफ अब निर्णायक लड़ाई शुरू हो चुकी है। सुरक्षा बलों ने इलाके को पूरी तरह माओवाद मुक्त करने के लिए एक महीने का लक्ष्य तय किया है और साफ संदेश दिया है कि अब किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।

शनिवार देर शाम Central Reserve Police Force (सीआरपीएफ) के स्पेशल डीजी दीपक कुमार चाईबासा के दुर्गम बालिबा कैंप पहुंचे, जहां उन्होंने माओवादी विरोधी अभियान की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर आगामी रणनीति को अंतिम रूप दिया।

स्पेशल डीजी ने कुख्यात माओवादी नेता मिसिर बेसरा और उसके दस्ते को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि वे जल्द से जल्द आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आएं, अन्यथा उन्हें सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

बैठक के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि अब सुरक्षा बल आक्रामक रणनीति अपनाएंगे। माओवादियों के ठिकानों को नष्ट करने, उनकी रसद आपूर्ति रोकने और जंगलों में उनकी गतिविधियों को पूरी तरह खत्म करने के लिए विशेष योजना तैयार की गई है।

करीब दो घंटे के दौरे में दीपक कुमार ने कैंप में तैनात जवानों से सीधे संवाद कर उनका मनोबल बढ़ाया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी कर रहे जवानों की सराहना की और भरोसा दिलाया कि उनके हर जरूरत का ध्यान रखा जाएगा।

इस दौरान जब उन्हें जानकारी मिली कि अभियान में शामिल कुछ जवान मलेरिया से पीड़ित हैं, तो उन्होंने तुरंत संवेदनशीलता दिखाते हुए 6-7 जवानों को अपने हेलीकॉप्टर से बेहतर इलाज के लिए रांची भेजने की व्यवस्था की।

सुरक्षा बलों का कहना है कि इस बार अभियान पूरी तैयारी और समन्वय के साथ चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस सख्त रणनीति और समयबद्ध लक्ष्य के साथ जल्द ही सारंडा के जंगलों को माओवादियों से पूरी तरह मुक्त करने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा।

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