Palamu: झारखंड के पलामू जिले में लागू आजीविका मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है। इसी कड़ी में अरुणाचल प्रदेश की 18 सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम ने जिले के नौडीहा बाजार और विश्रामपुर प्रखंड का दौरा कर यहां के सफल मॉडल का गहन अध्ययन किया।
दो दिवसीय इस भ्रमण के दौरान टीम ने खास तौर पर अल्ट्रा-पुअर परिवार उत्थान मॉडल को करीब से देखा, जिसे झारखंड में बेहद प्रभावी तरीके से लागू किया गया है। इस मॉडल के जरिए गरीब परिवारों को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार किया गया है।
टीम ने झारखंड राज्य आजीविका प्रोत्साहन सोसाइटी के तहत संचालित ‘उपज परियोजना’, सखी मंडलों की गतिविधियां, प्रशिक्षण प्रक्रिया और जमीनी स्तर पर इसके क्रियान्वयन को विस्तार से समझा। खासकर महिलाओं के समूहों द्वारा संचालित आर्थिक गतिविधियों ने टीम को काफी प्रभावित किया।
टीम लीडर सोमी पैती ने बताया कि वर्ष 2017 से झारखंड में चल रहे आजीविका कार्यक्रम अब देश के लिए एक आदर्श बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि अल्ट्रा-पुअर परिवारों के साथ यहां जिस तरह काम हुआ है, वह प्रेरणादायक है और उनके राज्य में भी इसी मॉडल को लागू किया जाएगा।
टीम के अन्य सदस्य करमा ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में झारखंड में जो परिवर्तन देखने को मिला है, वह उल्लेखनीय है। उन्होंने कहा कि यहां की तकनीक और कार्यप्रणाली को अरुणाचल प्रदेश में लागू कर गरीब परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जाएगा।
भ्रमण के दौरान टीम ने सिलाई, अगरबत्ती निर्माण, दोना-पत्तल उत्पादन, बासौरा फार्मिंग और अपैरल पार्क जैसी गतिविधियों को देखा। इन पहलों के माध्यम से महिलाओं के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों ने टीम को काफी प्रभावित किया।
अरुणाचल प्रदेश के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक ने कहा कि उनके राज्य में भी भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन झारखंड का यह मॉडल उन्हें नई दिशा दिखा रहा है। अब टीम अपने राज्य में समावेशी आजीविका मिशन को और मजबूत तरीके से लागू करने की तैयारी में है।


