Ranchi: संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम सहित तीन संविधान संशोधन विधेयकों के पारित नहीं हो पाने पर झारखंड कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया है। पार्टी ने इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के बयान को भी तथ्य से परे करार दिया।
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा कि विपक्षी दलों ने संसद में “पहरेदार” की भूमिका निभाते हुए लोकतंत्र को कमजोर होने से बचाया। उनके मुताबिक, इन विधेयकों के जरिए सरकार की मंशा लोकतांत्रिक ढांचे को प्रभावित करने की थी, जिसे विपक्ष ने सफल नहीं होने दिया।
सोनाल शांति ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार महिलाओं के हितों को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ होती, तो 2024 के आम चुनाव में ही मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जा सकता था, जिससे बड़ी संख्या में महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होता।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पहले जनगणना और परिसीमन की शर्त जोड़कर महिला आरक्षण को 2029 तक टालना चाहती थी, और अब संशोधन के नाम पर जल्दबाजी में नए विधेयक लाने की कोशिश की गई। कांग्रेस ने इस पर सरकार से जवाब मांगा है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 के पारित न होने को संघीय ढांचे की रक्षा बताया और कहा कि इससे लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश विफल हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिलाओं की भावनाओं का इस्तेमाल कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही थी।
वहीं, बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इन विधेयकों के गिरने को लोकतंत्र के लिए “काला अध्याय” बताया था। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी की उम्मीदों को झटका लगा है और विपक्षी दलों पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया।
इस पूरे मुद्दे पर सियासी घमासान तेज हो गया है। एक तरफ कांग्रेस इसे लोकतंत्र और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा बता रही है, तो दूसरी ओर भाजपा इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ कदम मान रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।

