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राम सूर्या मुंडा की पहल से सजी संस्कृति, राज्यभर में आदिवासी समाज को वाद्य यंत्रों का वितरण

Khunti: आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा, लोककला और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने एवं आगे बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार के कल्याण विभाग द्वारा खूंटी जिले में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई है। इस पहल के तहत जिले के कुल 99 ग्रामसभाओं का चयन किया गया है, जहां धूमकुड़िया भवन मौजूद हैं, और इन सभी ग्रामसभाओं को पारंपरिक वाद्य यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे।

इस योजना के प्रथम चरण में शनिवार को खूंटी प्रखण्ड क्षेत्र के 17 ग्रामसभाओं तथा अड़की प्रखण्ड के 4 ग्रामसभाओं के ग्राम प्रधानों को पारंपरिक वाद्य यंत्रों का वितरण किया गया। इस अवसर पर मांदर, नगाड़ा, बांसुरी, करताल, घुंघरू, झाल जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ-साथ पूजन सामग्री भी प्रदान की गई।

यह वितरण समारोह खूंटी अंचल के सभागार में गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ, जहां मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित खूंटी विधायक रामसूर्या मुंडा ने ग्राम प्रधानों के बीच वाद्य यंत्रों का वितरण किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक रामसूर्या मुंडा ने कहा कि “अबुआ सरकार” की यह पहल आदिवासी समाज की पहचान, परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर को सशक्त बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की उपलब्धता सीमित हो गई थी, जिससे सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में कठिनाई होती थी। इस योजना के माध्यम से न केवल इन परंपराओं को पुनर्जीवित किया जाएगा, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि उनके द्वारा इस योजना को धरातल पर लाने के लिए लगातार प्रयास किए गए और कल्याण मंत्री चमरा लिंडा को इस संबंध में अवगत कराया गया, जिसके बाद इस दिशा में ठोस पहल संभव हो सकी और राज्यभर के आदिवासी समाज के लिये इस योजना की शुरुआत की गई और वाद्य यंत्रों का वितरण की शुरुआत की गई। उन्होंने विश्वास जताया कि यह योजना गांव-गांव में खुशियों और उत्साह का संचार करेगी तथा सामुदायिक एकता को और मजबूत बनाएगी।

प्रखण्ड विकास पदाधिकारी ज्योति कुमारी ने अपने संबोधन में कहा कि कल्याण विभाग द्वारा आदिवासी समाज की पारंपरिक जीवनशैली और सांस्कृतिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए यह योजना तैयार की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन ग्रामसभाओं में धूमकुड़िया भवन उपलब्ध हैं, उन्हीं को इस योजना में शामिल किया गया है, ताकि वाद्य यंत्रों का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने आगे कहा कि ये सभी वाद्य यंत्र धूमकुड़िया भवन में रखे जाएंगे और ग्रामसभा स्तर पर त्योहारों, विवाह समारोहों एवं अन्य सामाजिक आयोजनों में इनका उपयोग किया जा सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन वाद्य यंत्रों के उपयोग के लिए ग्रामीणों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। इनके रखरखाव और संरक्षण की पूरी जिम्मेदारी संबंधित ग्रामसभा की होगी, जिससे सामूहिक जिम्मेदारी और भागीदारी को भी बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम में अंचल अधिकारी, प्रखण्ड प्रमुख, विभिन्न पंचायतों के मुखिया, ग्राम प्रधान एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में उत्साह और सांस्कृतिक गौरव की झलक स्पष्ट रूप से देखने को मिली।

चरणबद्ध तरीके से होगा वितरण:

जिले के अन्य प्रखण्डों में भी आगामी दिनों में वाद्य यंत्रों का वितरण किया जाएगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार—

कर्रा प्रखण्ड में 20 अप्रैल को 23 ग्रामसभाओं को वाद्य यंत्र प्रदान किए जाएंगे।

रनिया प्रखण्ड में 22 अप्रैल को 4 ग्रामसभाओं में वितरण किया जाएगा।

तोरपा प्रखण्ड में 22 अप्रैल को 27 ग्रामसभाओं को वाद्य यंत्र दिए जाएंगे।

मुरहू प्रखण्ड में 23 अप्रैल को 24 ग्रामसभाओं में वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।

इस प्रकार, चरणबद्ध ढंग से जिले की सभी 99 ग्रामसभाओं को इस योजना से आच्छादित किया जाएगा।

सांस्कृतिक पुनर्जागरण की उम्मीद:

यह पहल न केवल पारंपरिक वाद्य यंत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा भी प्रदान करेगी। गांवों में धूमकुड़िया भवनों के माध्यम से इन वाद्य यंत्रों का सामूहिक उपयोग सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

स्थानीय लोगों में इस योजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है और इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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