Ranchi: झारखंड की सियासत में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद पांडेय ने आरोप लगाया कि मरांडी केवल चर्चा में बने रहने और “चाय पीने” के लिए राजभवन का दौरा करते हैं, जबकि जनता के असली मुद्दों से उनका कोई सरोकार नहीं है।
विनोद पांडेय ने कहा कि बाबूलाल मरांडी बार-बार गवर्नर हाउस जाकर पुराने डोमिसाइल मुद्दों को दोहराते हैं और सुर्खियों में बने रहने की कोशिश करते हैं। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में भी भाजपा के वरिष्ठ नेता उनसे दूरी बना रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर उनकी स्थिति कमजोर हो रही है।
झामुमो नेता ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच मरांडी को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। पांडेय के अनुसार, कार्यकर्ता अब यह सवाल उठा रहे हैं कि मरांडी पार्टी और जनता के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय केवल राजनीतिक बयानबाज़ी में व्यस्त रहते हैं।
2029 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी झामुमो ने मरांडी पर तंज कसा। पांडेय ने कहा कि यदि वर्तमान स्थिति जारी रही, तो भाजपा के लिए अगला चुनाव और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि मरांडी भाजपा के लिए “शगुन की 11 सीटें” लाने की बात करते हैं, जबकि पार्टी के लिए पाँच सीटें जीतना भी मुश्किल हो सकता है।
झामुमो ने पिछले चुनावी प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा को 24 सीटें मिली थीं, जो बाद में घटकर 21 रह गईं। पांडेय ने दावा किया कि मरांडी के नेतृत्व में भाजपा एक भी उपचुनाव जीतने में सफल नहीं रही है, जिससे उनकी राजनीतिक क्षमता पर सवाल उठते हैं।
अंत में, झामुमो ने बाबूलाल मरांडी से अपना स्पष्ट राजनीतिक एजेंडा जनता के सामने रखने की मांग की। पार्टी का कहना है कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि वे राज्य के विकास के लिए क्या दृष्टिकोण रखते हैं, न कि केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में समय व्यतीत करें।
यह बयान झारखंड की राजनीति में बढ़ती बयानबाज़ी और आगामी चुनावों की तैयारियों का संकेत देता है, जिससे आने वाले समय में सियासी माहौल और गर्म होने की संभावना है।



