Hazaribagh: झारखंड में सामने आए ट्रेजरी घोटाले ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है। हजारीबाग ट्रेजरी से पिछले आठ वर्षों में 15 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी की पुष्टि होने के बाद हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल ने इसे देश के बहुचर्चित चारा घोटाला से भी बड़ा घोटाला करार दिया है। उन्होंने पूरे राज्य के सभी ट्रेजरी की व्यापक और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सांसद का बड़ा बयान
सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि ट्रेजरी किसी भी राज्य की वित्तीय व्यवस्था की रीढ़ होती है। यदि इसी प्रणाली में भ्रष्टाचार सामने आता है, तो यह गंभीर प्रशासनिक विफलता का संकेत है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह मामला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि राज्य की वित्तीय सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, यदि समय रहते गहन जांच नहीं कराई गई, तो घोटाले की राशि हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
पूरे राज्य में जांच की मांग
सांसद ने राज्य सरकार से अपील की कि हजारीबाग और बोकारो तक सीमित रहने के बजाय झारखंड के सभी जिलों के ट्रेजरी की जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि घोटाले का खुलासा वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हुआ है, इसलिए सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
हजारीबाग उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह के अनुसार, प्रारंभिक जांच में पाया गया कि सरकारी राशि को अवैध रूप से विभिन्न संदिग्ध बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया। इस मामले की जांच के लिए अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था, जिसने अवैध लेनदेन की पुष्टि की।
21 बैंक खाते फ्रीज, 1.60 करोड़ रुपये सुरक्षित
जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 21 संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करने का निर्देश दिया। इन खातों में उपलब्ध लगभग 1.60 करोड़ रुपये की राशि को सुरक्षित कर लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि आगे की जांच में और भी वित्तीय अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
मास्टरमाइंड समेत पांच आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में अकाउंट सेक्शन से जुड़े तीन सिपाहियों—शंभू कुमार, धीरेंद्र कुमार सिंह और रजनीश कुमार सिंह उर्फ पंकज—को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इसके अतिरिक्त शंभू कुमार और रजनीश कुमार सिंह की पत्नियों को भी न्यायिक हिरासत में लिया गया है। इस प्रकार अब तक कुल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य संदिग्धों से पूछताछ की तैयारी जारी है।
राज्य की वित्तीय सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घोटाले ने राज्य की वित्तीय निगरानी प्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह घोटाला झारखंड के इतिहास का सबसे बड़ा आर्थिक अपराध साबित हो सकता है। फिलहाल, पूरे मामले पर राज्य सरकार के अगले कदम और संभावित उच्चस्तरीय जांच पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

