Ranchi: रांची में झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन JPSC और JSSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मुद्दा सदन में भी देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी के विधायक छात्रों के आंदोलन के समर्थन में अनोखे अंदाज में विधानसभा पहुंचे। विधायकों ने प्रिंटेड मास्क पहनकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया और पूरे मामले की CBI जांच की मांग दोहराई।
भाजपा विधायकों ने अपने मास्क के जरिए सरकार पर सवाल उठाए। मास्क पर ‘जागो सरकार, होश में आओ’, ‘JPSC, JSSC-CGL की धांधली पर जवाब दो’ और ‘नौकरी हमारा हक, बिकाऊ नहीं’ जैसे नारे लिखे थे। इसके अलावा ‘मेहनत हमारी, सफलता हमारी’, ‘हक हमारा, धांधली बंद करो’, ‘नौकरी दो’ और ‘हम चुप नहीं बैठेंगे, हक लेकर रहेंगे’ जैसे संदेश भी नजर आए।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर झारखंड के छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि छात्र पूरे मामले की CBI जांच की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार इस दिशा में अब तक कोई कदम नहीं उठा रही है। इसी विरोध को भाजपा ने विधानसभा के भीतर मास्क के जरिए सामने रखा।
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की CBI जांच की मांग को लेकर दोनों की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं आई है। भाजपा नेता ने कहा कि छात्रों की आवाज को नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को उनकी मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
भाजपा ने साफ किया कि JPSC और JSSC विवाद को लेकर उसका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब तक राज्य सरकार कथित परीक्षा धांधली की CBI जांच की अनुशंसा नहीं करती, तब तक पार्टी सदन से लेकर सड़क तक संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ किसी भी तरह का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इससे पहले बाबूलाल मरांडी ने दिसंबर 2024 के विधानसभा के शीतकालीन सत्र से जुड़ा एक वीडियो भी जारी किया था। उन्होंने दावा किया कि उस समय भी उन्होंने JSSC-CGL परीक्षा के परिणाम पर सवाल उठाते हुए CBI जांच की मांग की थी। अब छात्रों के आंदोलन के बीच भाजपा ने इस मुद्दे को एक बार फिर जोर-शोर से उठाया है।
भाजपा का कहना है कि JPSC और JSSC से जुड़े कथित विवादों की निष्पक्ष जांच होने तक वह छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज उठाती रहेगी। विधानसभा में मास्क के जरिए किया गया प्रदर्शन इसी राजनीतिक दबाव की कड़ी माना जा रहा है। वहीं, इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच आने वाले दिनों में सदन के भीतर टकराव बढ़ने के आसार हैं।

