Ranchi: झारखंड में लंबे समय से खाली पड़े बोर्ड, निगम और आयोगों के पुनर्गठन को लेकर कांग्रेस ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने कांग्रेस कोटे से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए 4 अगस्त को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में योग्य और संगठन के प्रति समर्पित नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के नामों पर चर्चा की जाएगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में इस प्रक्रिया के लिए 14 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति में विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, उपनेता राजेश कच्छप, प्रदेश कांग्रेस के सभी पूर्व अध्यक्ष और पूर्व कार्यकारी अध्यक्षों को शामिल किया गया है। समिति का उद्देश्य विभिन्न बोर्ड, निगम और आयोगों के लिए उपयुक्त नामों का चयन करना है।
झारखंड कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी ने बताया कि 4 अगस्त को होने वाली बैठक में आवास बोर्ड, गौ सेवा आयोग, युवा आयोग, बाल संरक्षण आयोग सहित अन्य बोर्ड और निगमों में रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ऐसे लोगों का चयन करेगी, जिन्होंने संगठन के लिए समर्पित होकर काम किया है।
कांग्रेस की इस पहल पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अविनेश कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस जनता की सेवा से अधिक सत्ता का लाभ लेने में रुचि रखती है। उन्होंने कहा कि बोर्ड, निगम और आयोगों में नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस की जल्दबाजी उसके “सत्ता लोलुप” चरित्र को दर्शाती है।
अविनेश कुमार सिंह ने कहा कि भाजपा भी चाहती है कि बोर्ड, निगम और आयोगों का जल्द पुनर्गठन हो, लेकिन नियुक्तियां योग्यता और जनहित को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सत्ता में बने रहने और राजनीतिक लाभ लेने के लिए झामुमो के साथ जुड़ी हुई है।
वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया आई है। पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता ने कहा कि नेतृत्व से मिले निर्देशों के अनुसार शारदीय नवरात्र से पहले राज्य के सभी बोर्ड, निगम और आयोगों का पुनर्गठन पूरा करने की तैयारी है।
अब 4 अगस्त को होने वाली कांग्रेस की बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद बोर्ड, निगम और आयोगों में नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज होगी, जिससे लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने का रास्ता साफ हो सकता है।

