Ranchi : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में क्लस्टर सिस्टम और सीट कटौती को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। गुरुवार को हुए उग्र प्रदर्शन के बाद छात्र संगठनों के कई नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के विरोध में शुक्रवार को भी छात्रों का आंदोलन जारी रहा। इस बीच शिक्षकों और कर्मचारियों ने पेन डाउन हड़ताल कर विश्वविद्यालय प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित किया।
शुक्रवार को विश्वविद्यालय का प्रशासनिक भवन पूरी तरह बंद रहा और परिसर में सामान्य दिनों की तुलना में सन्नाटा पसरा रहा। पेन डाउन हड़ताल के कारण प्रशासनिक गतिविधियां ठप रहीं, जबकि छात्र संगठन कुलपति कार्यालय के बाहर जुटकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह छात्र हितों से जुड़ा है। उनका आरोप है कि क्लस्टर सिस्टम, सीटों में कटौती और नामांकन से जुड़ी समस्याओं को लेकर वे लगातार आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर विचार करने के बजाय छात्र नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर संवाद से बचने और पुलिसिया कार्रवाई का सहारा लेने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि नए कुलपति के कार्यभार संभालने के बाद से विश्वविद्यालय में लगातार विवाद बढ़े हैं। उनका मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक शिक्षण संस्थान में छात्रों की समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से होना चाहिए, न कि मुकदमे दर्ज कर।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारी और शिक्षक छात्रों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं हैं। उनका कहना है कि क्लस्टर सिस्टम लागू होने के बाद विषय चयन, सीटों की कमी और अन्य कॉलेजों में पढ़ाई की मजबूरी जैसी कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आई हैं, लेकिन इन मुद्दों पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा तथा पूरे मामले की शिकायत राज्य सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग और लोकभवन से भी की जाएगी।
छात्रों का कहना है कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के हितों और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर है। फिलहाल विश्वविद्यालय में गतिरोध बना हुआ है और अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम और संभावित समाधान पर टिकी हुई है।


