Dhanbad: धनबाद में रॉयल्टी चालान की नई व्यवस्था के विरोध में सोमवार को जिला संवेदक संघ ने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में संवेदकों ने कंबाइंड बिल्डिंग से रणधीर वर्मा चौक तक पैदल मार्च निकालकर राज्य सरकार और खनन विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नई व्यवस्था के कारण सरकारी निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं और संवेदकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
धरने को संबोधित करते हुए धनबाद जिला संवेदक संघ के अध्यक्ष आकाश रवानी ने नई रॉयल्टी चालान प्रक्रिया को पूरी तरह अव्यावहारिक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार जिस प्रकार के रॉयल्टी चालान की मांग कर रही है, उसकी व्यवस्था धनबाद जिले में उपलब्ध ही नहीं है। उनके अनुसार जिले में अब तक बालू घाटों की नियमित बंदोबस्ती नहीं हुई है और गिट्टी सहित अन्य निर्माण सामग्री के वैध रॉयल्टी चालान भी आसानी से नहीं मिल पा रहे हैं।
संवेदक संघ का कहना है कि पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत रॉयल्टी शुल्क जमा करने के बाद निर्माण कार्यों का भुगतान समय पर हो जाता था। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई संवेदकों का भुगतान महीनों से लंबित है। इसका असर विकास योजनाओं की गति पर पड़ रहा है और छोटे व मध्यम स्तर के संवेदकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
प्रदर्शन के दौरान संघ ने जिला उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री और राज्य के खनन मंत्री को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में नई रॉयल्टी चालान व्यवस्था को वापस लेने तथा संवेदकों की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरल और प्रभावी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। उनका कहना है कि वर्तमान प्रणाली में काम करना मुश्किल हो गया है।
संवेदकों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो जिले के सभी कांट्रेक्टर किसी भी सरकारी विभाग की नई टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में नए कार्य लेना आर्थिक रूप से जोखिम भरा साबित हो सकता है।
संघ ने यह भी घोषणा की कि यदि सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो रॉयल्टी चालान की नई व्यवस्था को चुनौती देते हुए झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की जाएगी। उनका कहना है कि यह मामला केवल संवेदकों का नहीं, बल्कि राज्य की विकास योजनाओं और सार्वजनिक हित से भी जुड़ा हुआ है।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में जिले के संवेदकों ने भाग लिया और एक स्वर में सरकार से नई व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की। संघ का कहना है कि वह बातचीत के माध्यम से समाधान चाहता है, लेकिन यदि उनकी मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।


