Giridihi : पारसनाथ की तराई में बसे मधुबन पंचायत के करीब 10 टोले आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। नतीजतन, बीमारों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को आज भी खाट का सहारा लेना पड़ता है। हाल के दो मामलों ने एक बार फिर इस गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है।
27 मई और 11 जुलाई को प्रसव पीड़ा से जूझ रही दो आदिवासी महिलाओं को सड़क न होने के कारण खाट पर कई किलोमीटर तक उठाकर मुख्य सड़क तक लाया गया। वहां से वाहन की व्यवस्था कर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।
11 जुलाई को करुआटांड निवासी संतोष मुर्मू की पत्नी लोगो टुडू को प्रसव पीड़ा होने पर एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें करीब चार किलोमीटर तक खाट पर उठाकर पिपराडीह मुख्य सड़क तक पहुंचाया, जहां से निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया।
यह विडंबना है कि जिस मधुबन में देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं और जहां बड़े पैमाने पर धार्मिक एवं पर्यटन विकास हुआ है, उसी पंचायत के कई गांव आज भी सड़क, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

प्रभावित गांवों में कुरुआटांड, दलुवाडीह, डाहिया, ईटाबेड़ा, गाड़ापरोम, सहेरबेड़ा, जिरबेड़ा, सतकटिया और बोरवाबेड़ा सहित लगभग 10 टोले शामिल हैं।
10 जुलाई को इन गांवों के ग्रामीण गिरिडीह समाहरणालय पहुंचे और उपायुक्त रामनिवास यादव को ज्ञापन सौंपकर सड़क, पुल-पुलिया, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग की। ग्रामीणों के अनुसार, उपायुक्त ने स्वयं गांव का दौरा कर स्थिति का जायजा लेने का आश्वासन दिया है।
ग्रामीणों की समस्या का एक बड़ा कारण यह है कि यह इलाका पारसनाथ वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत आता है। करीब 42 वर्ष पहले इसे वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था। मधुबन से लगभग 500 मीटर आगे वन क्षेत्र शुरू हो जाता है, जहां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम लागू होने के कारण सड़क निर्माण में कानूनी बाधाएं आती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि नियमों का हवाला देकर उनके गांवों में सड़क नहीं बनाई जाती, जबकि अन्य स्थानों पर निर्माण कार्य होते रहते हैं। उनका सवाल है कि विकास की योजनाओं का लाभ उन्हें कब मिलेगा।
पीरटांड़ के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) मनोज मरांडी ने कहा कि दलुवाडीह सहित 10 टोलों को जोड़ने वाली सड़क की आवश्यकता को लेकर रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को भेज दी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस दिशा में जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने तक उनके लिए अस्पताल पहुंचना, बच्चों को स्कूल भेजना और दैनिक जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करना बेहद कठिन बना रहेगा। उनका आग्रह है कि मानव जीवन और बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए सड़क निर्माण का स्थायी समाधान निकाला जाए।



