Ranchi : झारखंड सरकार द्वारा आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। एक ओर विपक्षी भाजपा इस कार्यक्रम को लेकर सरकार पर सवाल उठा रही है, वहीं सत्तारूढ़ दल इसे राज्य में निवेश और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बता रहा है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
भाजपा ने प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार जनता को विकास और निवेश के नाम पर केवल सपने दिखा रही है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संदीप वर्मा ने आरोप लगाया कि युवाओं को रोजगार, महिलाओं को सुरक्षा और राज्य में उद्योगों के विकास के जो वादे किए गए थे, वे अब तक धरातल पर नजर नहीं आए हैं।
भाजपा ने निवेश सम्मेलन में राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि जब यह बैठक निवेश और आर्थिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रित थी, तब वित्त मंत्री का शामिल नहीं होना सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है। भाजपा ने इसे केवल दिखावटी आयोजन करार देते हुए सरकार से पिछले वर्षों में हुए निवेश और रोजगार सृजन का ब्योरा मांगा।
संदीप वर्मा ने कहा कि सरकार लंबे समय से सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए निवेशकों को सुविधा देने का दावा करती रही है, लेकिन उद्योग जगत अब भी जटिल प्रक्रियाओं और देरी की शिकायत करता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि उनके कार्यकाल में कितने बड़े उद्योग स्थापित हुए और उनसे कितने स्थायी रोजगार सृजित हुए।
विपक्ष के आरोपों पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रदेश कांग्रेस महासचिव शमशेर आलम ने भाजपा के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि विपक्ष को पहले अपने शासनकाल की नीतियों और दावों को याद करना चाहिए। उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि “हाथी उड़ाने” जैसे पुराने दावों को भूलकर अब सरकार पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
वित्त मंत्री की अनुपस्थिति को लेकर कांग्रेस ने कहा कि उनका कोई पूर्व निर्धारित निजी कार्यक्रम रहा होगा, जिसके कारण वे बैठक में शामिल नहीं हो सके। शमशेर आलम ने दावा किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार निवेश को बढ़ावा देने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है और आने वाले समय में इन पहलों का सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों से झारखंड में निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा और राज्य के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन को लेकर शुरू हुई यह राजनीतिक बहस अब तेज होती दिख रही है। जहां विपक्ष सरकार से निवेश, उद्योग और रोजगार के मोर्चे पर जवाब मांग रहा है, वहीं सत्तापक्ष इन प्रयासों को झारखंड के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए भविष्य में बेहतर परिणाम मिलने का दावा कर रहा है।



