Ranchi : झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में तीन दशक तक सक्रिय रहे एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियां नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता मान रही हैं। पुलिस का दावा है कि उसकी गिरफ्तारी से सारंडा और पारसनाथ क्षेत्र में माओवादी संगठन की पकड़ लगभग समाप्त हो गई है। अब पुलिस का मुख्य लक्ष्य एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली असीम मंडल उर्फ आकाश की गिरफ्तारी है।
पुलिस के अनुसार, खुफिया एजेंसियां लंबे समय से मिसिर बेसरा की गतिविधियों पर नजर रख रही थीं। कोबरा, जगुआर और अन्य सुरक्षा बलों की टीमें सारंडा क्षेत्र में उसकी तलाश कर रही थीं। इसी दौरान सूचना मिली कि वह अपने साथियों के साथ गिरिडीह लौटने की कोशिश कर रहा है। सटीक लोकेशन और ताजा तस्वीर मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने उसे गिरिडीह पहुंचने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई में उसके साथ 15 लाख रुपये के इनामी मोछू उर्फ किस्मत और एक अन्य सहयोगी गौरव को भी पकड़ा गया। मौके से तीन एके-47 राइफलें बरामद की गईं।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि मिसिर बेसरा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति और बाद में पोलित ब्यूरो का सदस्य रह चुका था। संगठन की सैन्य रणनीति तैयार करने, बड़े हमलों की योजना बनाने और झारखंड के सारंडा, कोल्हान, पारसनाथ तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उसके खिलाफ हत्या, सुरक्षाबलों पर हमले, विस्फोट, लेवी वसूली, हथियार लूट और अन्य गंभीर मामलों के कई मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस के मुताबिक, मिसिर बेसरा का नेटवर्क केवल झारखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ तक फैला हुआ था। छत्तीसगढ़ में उस पर 1.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। लंबे समय तक वह जंगलों में रहकर संगठन का संचालन करता रहा और सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देता रहा।

अधिकारियों का कहना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद अब झारखंड में एक करोड़ रुपये का इनामी केवल असीम मंडल उर्फ आकाश ही बचा है। पुलिस के अनुसार, असीम मंडल पश्चिम बंगाल के मिदनापुर का रहने वाला है और फिलहाल दलमा के जंगलों के रास्ते पश्चिम बंगाल की ओर जाने की कोशिश कर रहा है। सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश में लगातार अभियान चला रही हैं।
झारखंड पुलिस का दावा है कि पिछले 14 वर्षों में लगातार चलाए गए अभियानों से राज्य में नक्सली नेटवर्क काफी कमजोर हुआ है। पिछले चार वर्षों में बूढ़ा पहाड़, लुगु पहाड़ी, पारसनाथ और बुलबुल जैसे कई नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने अपनी पकड़ मजबूत की है। वर्ष 2025 में 34 और वर्ष 2026 में अब तक 22 नक्सली मुठभेड़ों में मारे जाने की जानकारी पुलिस ने दी है। इसके अलावा बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण भी किया है।
पुलिस का कहना है कि झारखंड में नक्सलवाद के प्रभाव वाले अधिकांश क्षेत्रों में अब सुरक्षा स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है। हालांकि दलमा क्षेत्र में अभी भी कुछ नक्सलियों की मौजूदगी बताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अभियान लगातार जारी रहेगा और शेष सक्रिय नक्सलियों के खिलाफ भी कार्रवाई कर राज्य में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।


