Palamu : झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पलामू में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। वीर बाबा चौहरमल कल्याण समिति और कांग्रेस नेताओं ने संयुक्त रूप से मंत्री की सुरक्षा बहाल करने की मांग करते हुए आंदोलन की घोषणा की है। इस संबंध में पलामू सर्किट हाउस में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए।
वीर बाबा चौहरमल कल्याण समिति के अध्यक्ष संदीप कुमार पासवान ने कहा कि वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की होगी।
संदीप पासवान ने आरोप लगाया कि राधाकृष्ण किशोर के साथ अनुसूचित जाति से होने के कारण सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उनका कहना था कि वे राज्य मंत्रिमंडल के एकमात्र दलित मंत्री हैं, फिर भी उनकी सुरक्षा को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर प्रदेशभर का पासवान समाज एकजुट है और आंदोलन के लिए तैयार है।
छतरपुर विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस नेता अशोक प्रसाद सोनी ने भी मंत्री की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राधाकृष्ण किशोर लंबे समय से नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सक्रिय रहकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाते रहे हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पाटन के मुखिया अखिल पासवान ने कहा कि पाटन-छतरपुर क्षेत्र लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहा है। वित्त मंत्री ने इस इलाके के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन चलाया जाएगा।
गौरतलब है कि हाल ही में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अधिकारियों की कार्यशैली से नाराज होकर अपनी सरकारी सुरक्षा वापस कर दी थी। इसके बाद से उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और समर्थक लगातार सरकार से उचित कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
अब इस पूरे मामले पर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन के और व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है।


