Dhanbad: झारखंड में उत्पाद सिपाही बहाली परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। इसी क्रम में धनबाद में भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
धनबाद जिला भाजपा कमेटी के नेतृत्व में यह प्रदर्शन रणधीर वर्मा चौक पर आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और युवाओं के भविष्य की रक्षा की मांग उठाई। उनका आरोप था कि राज्य में लगातार प्रश्न पत्र लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
भाजपा जिला अध्यक्ष श्रवण राय ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता समाप्त होती जा रही है। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हो रहा है और यह युवाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
भाजपा नेताओं ने मांग की कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो। साथ ही, उन्होंने उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द कर पुनः निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने की भी मांग की।
प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ही इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना था कि युवाओं के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि हाल ही में रांची के तमाड़ क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और एक कथित सोल्वर गैंग की गिरफ्तारी के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अब तक पेपर लीक का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलने की बात कही गई है, फिर भी विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है।
फिलहाल, इस प्रकरण को लेकर झारखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और सभी की नजरें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मामले में क्या निर्णय लेती है और परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।


