Khunti: अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सहायक अध्यापकों ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। आगामी 18 अप्रैल को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने, धरना देने तथा आमरण अनशन पर बैठने का निर्णय लिया गया है। इसको लेकर रविवार को झारखंड राज्य प्रशिक्षित अध्यापक संघ एवं झारखंड राज्य आकलन प्रशिक्षित सहायक अध्यापक संघ की संयुक्त बैठक कचहरी मैदान में जिलाध्यक्ष संजय पाठक की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष संजय पाठक ने कहा कि इस बार खूंटी जिला के सभी सहायक अध्यापक एकजुट होकर आंदोलन में भाग लेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि “सरकार अपनी माटी की है” इस सोच के कारण अब तक आंदोलन से बचते रहे, लेकिन हर बार शिक्षकों के साथ छलावा हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 से झारखंड के बच्चों का भविष्य संवारते-संवारते सहायक अध्यापकों का खुद का भविष्य प्रभावित हो गया है, जिसे सरकार को समझना चाहिए।
संजय पाठक ने बताया कि सहायक अध्यापकों में 99 प्रतिशत स्थानीय मूलवासी और आदिवासी हैं, इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय पर काम करने को मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने वेतन विसंगति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ही छत के नीचे समान कार्य करने वाले शिक्षकों को 60 से 80 हजार रुपये वेतन मिलता है, जबकि सहायक अध्यापकों को मात्र 19 से 21 हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं, जो पूरी तरह से असमानता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा आयोजित विभागीय आकलन परीक्षा में सहायक अध्यापकों ने अपनी दक्षता साबित कर दी है। इसलिए सरकार को आकलन परीक्षा को TET के समकक्ष मान्यता देते हुए सभी सहायक अध्यापकों को नियमित वेतनमान प्रदान करना चाहिए।
बैठक में बुधन सिंह मुंडा, रविंद्र मुंडा, विकास मुंडा, दिलीप पाढ़ी, गौरांग मुंडा, पतरस गुड़िया, कुंदन मुंडा, नामलेन नाग, मीना भोजराज, सुभाष सिंह, सांडों हासा पूर्ति, बीरबल नाग सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।


