Saraikela : झारखंड के Saraikela-Kharsawan जिले में होमगार्ड बहाली प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और घोटाले के आरोप सामने आए हैं। इस पूरे मामले का खुलासा Jharkhand Home Guard Welfare Association के प्रदेश महासचिव Rajiv Tiwari ने प्रेस वार्ता के दौरान किया।
आदित्यपुर स्थित आदिवासी कल्याण समिति में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजीव तिवारी ने दस्तावेजों के आधार पर दावा किया कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार कर बाहरी राज्यों के लोगों को स्थानीय निवासी दिखाकर नौकरी दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके लिए फर्जी आवासीय प्रमाण पत्रों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया।
सबसे चौंकाने वाला मामला एक ही पते से जुड़े आवेदनों का है। तिवारी के अनुसार, एक पते से कुल 73 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, जिनमें से 24 का चयन भी हो गया। इसी तरह एक अन्य पते से 11 में से 8 और कुछ जगहों पर लगभग सभी आवेदकों का चयन होना गंभीर संदेह पैदा करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक ही पते पर इतने लोग कैसे रह सकते हैं और प्रशासन ने बिना भौतिक सत्यापन के प्रमाण पत्र कैसे जारी कर दिए।
इस पूरे मामले को उन्होंने “सांठगांठ का खेल” बताते हुए कहा कि इसमें प्रशासनिक स्तर पर भी लापरवाही या मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, यह सिर्फ भर्ती घोटाला नहीं बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है।
राजीव तिवारी ने चेतावनी दी कि इस तरह की अनियमितताएं न केवल स्थानीय युवाओं के अधिकारों का हनन करती हैं, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद खतरनाक हैं। उन्होंने आशंका जताई कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में कोई भी फर्जी दस्तावेज के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था में घुसपैठ कर सकता है।
एसोसिएशन ने इस मामले को लेकर जिला प्रशासन को भी अवगत कराया है। उपायुक्त को ईमेल के जरिए संदिग्ध चयनित अभ्यर्थियों की सूची भेजी गई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
संगठन की प्रमुख मांगों में गम्हरिया और आदित्यपुर शहरी क्षेत्रों में चयनित उम्मीदवारों का डोर-टू-डोर सत्यापन, फर्जीवाड़ा करने वालों और संबंधित अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी, तथा गलत नियुक्तियों को तत्काल रद्द करना शामिल है।
इस प्रेस वार्ता में जिला स्तर के कई पदाधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाता है और क्या इस कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच हो पाती है या नहीं।

