Palamu: झारखंड के पलामू जिले में स्थित चियांकी एयरपोर्ट क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभर रहा है। भारत सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना उड़ान (UDAN) के तहत इस एयरपोर्ट को शुरू करने की पहल की गई है, जिससे पलामू को देश के प्रमुख शहरों से हवाई संपर्क मिल सकेगा। हालांकि, कुछ प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से यह परियोजना अभी तक अटकी हुई है।
चियांकी एयरपोर्ट के शुरू होने से पलामू में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है। वर्तमान में जिले की कनेक्टिविटी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। पलामू से झारखंड की राजधानी रांची लगभग 165 किलोमीटर, उत्तर प्रदेश के वाराणसी 266 किलोमीटर और बिहार के गया 162 किलोमीटर दूर हैं। सड़क मार्ग से इन शहरों तक पहुंचने में काफी समय लगता है, जिससे औद्योगिक घराने यहां निवेश करने से हिचकते हैं।
पलामू के सांसद विष्णुदयाल राम ने बताया कि चियांकी एयरपोर्ट को उड़ान परियोजना के तहत चयनित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने राज्य सरकार से जमीन की उपलब्धता, सुरक्षा व्यवस्था और मौसम संबंधी रिपोर्ट सहित कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से इनका समय पर जवाब नहीं भेजा गया, जिससे परियोजना में देरी हो रही है।
यह एयरपोर्ट 1970 के दशक में बनाया गया था और 1990 के दशक में पलामू में पड़े भीषण अकाल के दौरान इसका विशेष महत्व सामने आया था। उस समय देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव के दौरे से पहले मात्र 48 घंटे के भीतर इसका जीर्णोद्धार किया गया था। इस एयरपोर्ट ने राहत और बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
चियांकी एयरपोर्ट के संचालन से न केवल औद्योगिक प्रतिष्ठानों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। पलामू जिला लंबे समय से पलायन की समस्या से जूझता रहा है, जहां हजारों लोग रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों का रुख करते हैं। बेहतर हवाई संपर्क इस समस्या को कम करने में सहायक साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हवाई कनेक्टिविटी मिलने से पर्यटन, व्यापार और सेवा क्षेत्र को भी गति मिलेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी। साथ ही, निवेशकों के लिए पलामू एक आकर्षक गंतव्य बन सकता है।
समग्र रूप से, चियांकी एयरपोर्ट का संचालन पलामू की तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है। हालांकि, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा करना आवश्यक है। यदि यह परियोजना जल्द शुरू होती है, तो पलामू के विकास को नई उड़ान मिलना तय है।


