Ranchi : झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने सरकार से परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य में समयबद्ध भर्ती कैलेंडर को कानून के जरिए लागू किया जाना चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों को वर्षों तक परीक्षा और नियुक्ति का इंतजार न करना पड़े।
सुदेश महतो के मुताबिक हर वर्ष भर्ती कैलेंडर जारी हो और परीक्षा, परिणाम तथा नियुक्ति के लिए अधिकतम समय-सीमा तय की जाए। उन्होंने कहा कि अनावश्यक देरी के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। साथ ही भर्ती परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए कठोर कानून बनाने की जरूरत है।
उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक और डिजिटल निगरानी लागू करने पर जोर दिया। उनकी मांग है कि सभी परीक्षाओं की डिजिटल ट्रैकिंग, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन, सीसीटीवी निगरानी और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया जाए। इसके अलावा एआई आधारित नकल और असामान्य पैटर्न की पहचान जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भी हो।
आजसू प्रमुख ने अभ्यर्थियों के अधिकारों को मजबूत करने की भी मांग रखी। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों को ओएमआर शीट, उत्तर पुस्तिका, मॉडल उत्तर और अंकन प्रक्रिया देखने का अधिकार मिलना चाहिए। साथ ही उत्तर पुस्तिकाओं और मूल्यांकन का सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाए और त्रुटि सुधार के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।
बार-बार परीक्षा रद्द होने और भर्ती प्रक्रिया लंबित रहने से प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए सुदेश महतो ने उम्र सीमा में उचित छूट देने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्षों तक भर्ती नहीं होने के कारण जिन युवाओं की निर्धारित आयु सीमा समाप्त हो गई है, उन्हें न्यायसंगत राहत मिलनी चाहिए।
उन्होंने अभ्यर्थियों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए स्वतंत्र ग्रीवांस रिड्रेसल अथॉरिटी बनाने की मांग भी की। इसके साथ ही भर्ती परीक्षाओं से प्रभावित छात्रों की आर्थिक परेशानियों को देखते हुए विशेष छात्रवृत्ति योजना शुरू करने का सुझाव दिया, ताकि तैयारी कर रहे युवाओं को आर्थिक सहायता मिल सके।
सुदेश महतो ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा सिर्फ युवाओं के रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह झारखंड की साख, भर्ती संस्थानों की विश्वसनीयता और युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। उन्होंने सरकार से आजसू की मांगों पर गंभीरता से विचार कर ठोस कदम उठाने की अपील की।


