Ranchi : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच अब राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं। नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर JPSC सदस्य जमाल अहमद को तत्काल पदमुक्त करने और उनकी कथित आय से अधिक संपत्ति की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से जांच कराने की मांग की है।
अपने पत्र में बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि जमाल अहमद ने पिछले कुछ वर्षों में अपने पद का कथित दुरुपयोग करते हुए बड़ी मात्रा में चल और अचल संपत्ति अर्जित की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि आयोग की साख बनी रहे।

मरांडी ने आरोप लगाया कि रांची में जमाल अहमद के पास 3000 से 4000 वर्गफुट का एक आलीशान फ्लैट है और वे शहर में एक अन्य बड़े फ्लैट की भी तलाश कर रहे हैं। इसके अलावा हजारीबाग में भी उनके नाम या कथित बेनामी संपत्तियां होने की चर्चा का उल्लेख करते हुए उन्होंने इन सभी संपत्तियों की जांच कराने की मांग की।
भाजपा नेता ने अपने पत्र में यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति की नियुक्ति प्रक्रिया स्वयं जांच एजेंसियों के दायरे में हो, तो उसे JPSC जैसी संवैधानिक संस्था का सदस्य नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने नियमों की अनदेखी करते हुए पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के दबाव में जमाल अहमद की नियुक्ति की, जिससे आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यदि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे व्यक्ति को आयोग जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में जिम्मेदारी दी जाएगी, तो राज्य के लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा कमजोर होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित होती है तथा युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता है।
मुख्यमंत्री से की गई अपनी मांग में मरांडी ने कहा कि जमाल अहमद की सभी चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और आय के ज्ञात एवं अज्ञात स्रोतों की ACB से विस्तृत जांच कराई जाए। साथ ही जांच प्रभावित न हो और JPSC की गरिमा बनी रहे, इसके लिए उन्हें तत्काल पद से हटाया जाए।
गौरतलब है कि जमाल अहमद पहले प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे और वर्ष 2008 में उनकी नियुक्ति लेक्चरर के पद पर हुई थी। बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि उस नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस समाचार में उपलब्ध नहीं है।



