Dhanbad : धनबाद के चर्चित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) उत्तम आनंद हत्याकांड में झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोनों दोषियों लखन वर्मा और राहुल वर्मा की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने धनबाद की विशेष सीबीआई अदालत द्वारा सुनाई गई “अंतिम सांस तक कारावास” की सजा को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि यह कोई सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित होता है कि ऑटो से टक्कर मारने की घटना आकस्मिक नहीं थी। दोषियों ने पूरी योजना के तहत सड़क किनारे मॉर्निंग वॉक कर रहे जज उत्तम आनंद को पीछे से टक्कर मारकर उनकी हत्या की थी। अदालत ने माना कि दोषियों की ओर से सजा कम करने या बरी किए जाने के पक्ष में कोई ठोस कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं किया गया।
फैसले में अदालत ने सीबीआई की जांच को विश्वसनीय माना और वैज्ञानिक व तकनीकी साक्ष्यों को विशेष महत्व दिया। सीसीटीवी फुटेज की थ्री-डी मैपिंग, ऑटो की गति का विश्लेषण, मोबाइल लोकेशन और फॉरेंसिक रिपोर्ट जैसे डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि वारदात पूरी तरह पूर्व नियोजित थी।
झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद की विशेष सीबीआई अदालत के 6 अगस्त 2022 के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया। निचली अदालत ने दोनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और धारा 201 (साक्ष्य मिटाने) के तहत दोषी करार देते हुए जीवनभर जेल में रहने की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह सजा यथावत रहेगी।
गौरतलब है कि 28 जुलाई 2021 को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक के पास मॉर्निंग वॉक के दौरान एडीजे उत्तम आनंद को एक ऑटो ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दी थी। गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौत हो गई थी। शुरुआती दौर में इसे सड़क दुर्घटना माना गया था, लेकिन सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ लिया और जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
सीबीआई की जांच में यह निष्कर्ष निकला कि ऑटो चालक लखन वर्मा और उसके सहयोगी राहुल वर्मा ने सुनियोजित तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया था। जांच एजेंसी ने अदालत में कई तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्य पेश किए, जिनके आधार पर दोनों को दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
हालांकि, इस मामले में हत्या के वास्तविक मकसद को लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं। सीबीआई किसी बड़े षड्यंत्र या कथित मास्टरमाइंड का खुलासा नहीं कर सकी, जबकि जज उत्तम आनंद के परिजनों ने बड़े आपराधिक गिरोह की साजिश की आशंका जताई थी। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्य इरादतन हत्या साबित करने के लिए पर्याप्त हैं और दोषसिद्धि पर किसी प्रकार का संदेह नहीं है।



